मध्यप्रदेश के सागर शहर में पैदा हुआ, ठीक उस वक्त जब भारत की सेनाओं ने पूर्वी पाकिस्तान पर चढाई करके बांग्लादेश की नींव डालने के अभियान की शुरूआत की थी ा यानि 3 दिसंबर, 1971 की मध्य रात्रि ा बचपन से जवानी तक का सफर इसी खूबसूरत शहर में बीता मगर कैरियर के चलते दिल्ली की खाक छानने को मजबूर ा
सागर शहर ने जो संस्कार दिये उनमें अच्छा साहित्य लिखना पढना भी शामिल हैा कविता लिखता हूं पर आत्मसुख के लियेा शायद ये भरोसा नहीं कि वो छपने लायक हैं इसलिये कहीं प्रयास भी नहीं कियाा ये ब्लाग शायद इसीलिये बनाया है ताकि अपनी रचनात्मकता को महानगर की व्यस्तता की जंग लगने से बचाया जा सकेा
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